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संतों का अपमान भारतीय संस्कृति का अपमान
संतों का अपमान न करें, संतों के साथ राजनीति ना करें। संतों का अपमान भारतीय संस्कृति का अपमान है। जबकि भारत सहिष्णु देश है। यहां संतों का विरोध किया जाता है लेकिन यहां-वहां लगे फिल्मों के अश्लील पोस्टरों का विरोध नहीं किया जाता है। विरोध करना है तो इनका करें। गुरुओं का सम्मान करें। संतों के प्रति टिप्पणी अब सहन नहीं की जाएगी।
यह बात उपाध्याय निर्भयसागरजी महाराज ने कही। वे शहीद पार्क पर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संस्था द्वारा पूज्य संत तरुणसागरजी महाराज पर संगीतकार विशाल दादलानी द्वारा की गई अशोभनीय टिप्पणी के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।