- फूलों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी: CM ने उज्जैन में फ्लोरीकल्चर सेंटर बनाने का किया ऐलान, बोले- कम जमीन में ज्यादा आय का माध्यम बनेंगी उद्यानिकी फसलें
- महाकाल मंदिर में नई सुविधा: अन्न क्षेत्र में अब ऑनलाइन होगा दान, वेबसाइट के जरिए कहीं से भी कर सकेंगे दान
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: भांग-चंदन और ड्रायफ्रूट से सजे बाबा, “जय श्री महाकाल” से गूंजा परिसर
- उज्जैन के गजनीखेड़ी में प्रशासन की चौपाल: कलेक्टर-SP ने रात गांव में बिताई, मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया
- सुबह 4 बजे खुले कपाट: बाबा महाकाल का दूध-दही-घी से अभिषेक, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
संतों का अपमान भारतीय संस्कृति का अपमान
संतों का अपमान न करें, संतों के साथ राजनीति ना करें। संतों का अपमान भारतीय संस्कृति का अपमान है। जबकि भारत सहिष्णु देश है। यहां संतों का विरोध किया जाता है लेकिन यहां-वहां लगे फिल्मों के अश्लील पोस्टरों का विरोध नहीं किया जाता है। विरोध करना है तो इनका करें। गुरुओं का सम्मान करें। संतों के प्रति टिप्पणी अब सहन नहीं की जाएगी।
यह बात उपाध्याय निर्भयसागरजी महाराज ने कही। वे शहीद पार्क पर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संस्था द्वारा पूज्य संत तरुणसागरजी महाराज पर संगीतकार विशाल दादलानी द्वारा की गई अशोभनीय टिप्पणी के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।